
शिवराज यादव / हरिद्वार। कनखल स्थित अवधूत जगतराम उदासीन आश्रम की साध्वी सुदेश मुनि उदासीन (65) के ब्रह्मलीन होने पर संतों ने शोक जताया। ब्रह्मलीन होने की सूचना पर संत समाज और श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। जिसके उपरांत पूरे विधि-विधान से कनखल श्मशान घाट पर दाह संस्कार किया गया।
इस अवसर पर आश्रम संचालक स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि, संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि साध्वी सुदेश मुनि उदासीन पिछले लगभग 40 वर्षों से आश्रम से जुड़ी हुई थीं। उनके द्वारा किए जा रहे धार्मिक कार्यक्रम और लोगो की सेवा कार्य से स्थानीय लोगों के साथ साथ बाहरी श्रद्धालुओं में भी उनके प्रति आस्था थी।
युवा भारत साधु समाज महामंत्री स्वामी रवि देव शास्त्री, नया उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत नितिन दास ने कहा कि संतों का जीवन सेवा में व्यतीत होता है। ब्रह्मलीन साध्वी सुदेश मुनि ने सनातन का प्रचार प्रसार किया। उनके कार्यों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनके ब्रह्मलीन होने से अनुयायियों में बहुत दुख है।
इस अवसर पर बहन स्नेहलता पाठक, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, स्वामी नामदेव मुनि, महंत सत्यप्रकाश, महंत गंगादास, स्वामी हरिहरानंद, बाबा मोहन सिंह, बाबा तीरथ सिंह, साध्वी सुखजीत सरस्वती, साध्वी तृप्ता सरस्वती, स्वामी कैलाश मुनि आदि संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
