
शिवराज यादव / हरिद्वार। एसएसपी नवनीत सिंह के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए करीब 10 दिन पहले चोरी हुई चार माह की मासूम बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। कनखल और पिरान कलियर क्षेत्र से बच्चों की बरामदगी के बाद अब रोडीबेलवाला क्षेत्र से अपहृत बच्ची को भी सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचा दिया गया है। मामले में एक बाबा समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि तीन लाख रुपये के लालच में बच्चे की चोरी की साजिश रची गई थी, लेकिन आरोपित गलती से लड़के की जगह लड़की को उठा ले गए।
28 मई 2026 को संभल (उत्तर प्रदेश) निवासी पुष्पेंद्र ने चौकी रोडीबेलवाला में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपने परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आए थे। 27 मई की रात परिवार विष्णु घाट के निकट हाथी पुल के पास एक पेड़ के नीचे सो गया था। सुबह उठने पर उनकी चार माह की बेटी गायब मिली। काफी तलाश के बाद भी बच्ची का कोई सुराग नहीं लगा, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी नवनीत सिंह ने स्वयं मॉनिटरिंग करते हुए पुलिस टीमों को सक्रिय किया। बच्ची के चोरी होने का सही समय स्पष्ट न होने के कारण पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों की गतिविधियों की गहन जांच की। जांच के दौरान एक संदिग्ध दंपत्ति पर पुलिस का ध्यान गया, जो पहले एक बच्चे के साथ विष्णु घाट पर दिखाई दिया था और अगले दिन दो बच्चों के साथ बस में सवार होता नजर आया।
बस चालक और परिचालक से पूछताछ में पता चला कि दंपत्ति धामपुर तक गया और वहां से हावड़ा जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ। पुलिस ने धामपुर से हावड़ा के बीच पड़ने वाले करीब 65 रेलवे स्टेशनों पर जानकारी जुटाई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद जांच का रुख बदलते हुए पुलिस ने संदिग्धों के हरिद्वार आने के रास्ते की पड़ताल की। जांच में पता चला कि दंपत्ति शिवालिक नगर क्षेत्र की ब्रह्मपुरी कॉलोनी से विष्णु घाट पहुंचा था। स्थानीय लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली कि वे झाड़-फूंक करने वाले सत्यपाल नामक व्यक्ति की झोपड़ी में रह रहे थे।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ब्रह्मपुरी स्थित झोपड़ी पर दबिश दी और वहां से संदिग्ध बाबा सत्यपाल और तलाशे जा रहे महिला और पुरुष को बच्ची सहित पकड़ लिया। मिलान करने पर उक्त बच्ची वहीं 04 माह की बच्ची निकली जिसका अपहरण किया गया था। उपरोक्त घटना के अनावरण में चौकी प्रभारी रोड़ी बेलवाला नवीन सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल, कांस्टेबल निर्मल रागढ़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सीआईयू कार्यालय से कांस्टेबल वसीम ने टेक्निकल इनफॉरमेशन प्राप्त करने एवं प्रक्रिया करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूछताछ में आरोपितों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि लाल बहादुर और प्रीति रानी पति-पत्नी हैं और उनके चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटे और एक बेटी शामिल हैं। कुछ समय पहले प्रीति रानी के चचेरे भाई ने उसे बताया था कि एक दंपत्ति, जिनकी पहले से पांच बेटियां हैं, उन्हें बेटा चाहिए और इसके लिए वे तीन लाख रुपये देने को तैयार हैं। महिला ने अपना बेटा देने से इनकार कर दिया, लेकिन पैसों के लालच में उसने यह बात अपने परिचित सत्यपाल को बता दी।
इसके बाद सत्यपाल ने हरिद्वार के घाटों से बच्चा चोरी करने की योजना बनाई। योजना के तहत दंपत्ति 26 मई को इटावा और लखनऊ होते हुए हरिद्वार पहुंचा और सत्यपाल की झोपड़ी में रुका। 27 मई को वे अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर घाटों पर घूमते रहे और बच्चे चोरी करने का मौका तलाशते रहे। 28 मई की तड़के करीब चार बजे उन्होंने गहरी नींद में सो रहे परिवार के बीच से चार माह की बच्ची को लड़का समझकर उठा लिया, बाद में जब उन्हें पता चला कि चोरी किया गया बच्चा लड़की है तो वे उसे लेकर अपने गांव चले गए। अपनी बेटी को घर छोड़ने के बाद वे अपहृत बच्ची को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की नीयत से दोबारा हरिद्वार पहुंचे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें धर दबोचा और पूरे मामले का खुलासा कर दिया।
मामले में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सत्यपाल पुत्र विजय सिंह निवासी ग्राम सैदाबाद, कोतवाली लक्सर (हरिद्वार), लाल बहादुर पुत्र कन्हैया लाल निवासी नगरिया, थाना जसवंतनगर (इटावा) तथा प्रीति रानी पत्नी लाल बहादुर के रूप में हुई है।
इस पूरे ऑपरेशन में प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक गोपाल भट्ट, उपनिरीक्षक नवीन चौहान, संजीत कंडारी, नवीन नेगी, ऋषिकांत पटवाल और विक्रम बिष्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल, संजयपाल, संजीव राणा तथा कांस्टेबल निर्मल, सुनील चौहान, अजीत तोमर, राकेश और जसवंत भी टीम का हिस्सा रहे।
मामले के खुलासे में सीआईयू प्रभारी नरेंद्र बिष्ट के नेतृत्व में तकनीकी टीम ने भी अहम योगदान दिया। तकनीकी टीम में कांस्टेबल वसीम, हरवीर, द्वीप गौड़, नरेंद्र और उमेश शामिल रहे, जिन्होंने तकनीकी सूचनाएं जुटाने और उनका विश्लेषण कर आरोपितों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लगातार तीसरे बड़े बच्चा चोरी के मामले का सफल खुलासा कर हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर अपनी सक्रियता और दक्षता साबित की है। बच्ची की सकुशल बरामदगी से परिजनों ने राहत की सांस ली है, वहीं आमजन भी एसएसपी नवनीत सिंह और पूरी हरिद्वार पुलिस टीम की सराहना कर रहे हैं।
