
शिवराज यादव / हरिद्वार। बैसाख महीने की संक्रांत और खालसा सृजना दिवस पर कनखल स्थित निर्मल संतपुरा गुरुद्वारे में विशेष दीवान सजाए गए। जहां सैकड़ों की संख्या में संगत ने पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे माथा टेका। इसके साथ ही कथावाचक संत बलजिंदर सिंह शास्त्री से खालसा स्थापना की कथा सुनी। कथावाचक ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने श्री आनंदपुर साहिब में खालसा की स्थापना कर सिक्खों को अलग पहचान दी। उन्होंने जुल्म के खिलाफ लड़ना सिखाया।
संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना कर सिंह बनाए। जो जुल्म के खिलाफ लड़े और पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए। गुरु गोबिंद सिंह स्वयं ही गुरु और शिष्य बनकर गोबिंद राय से गोबिंद सिंह बने। गुरु के बिना गत नहीं है इसलिए सभी को अपने जीवन में एक गुरु अवश्य बनाना चाहिए जो सही राह दिखाए।
इस अवसर पर संत तरलोचन सिंह, ज्ञानी पंकज सिंह, प्रेम सिंह, कुलवंत कौर, कुलदीप सिंह, बलदेव सिंह, महेंद्र सिंह, इंद्रजीत सिंह बिट्टू, अपनिंदर कौर, सरबजीत कौर, हरविंदर सिंह रिंकू, नैनी महेंद्रू, पूनम नरूला, अमरजीत सिंह, सिमरन कौर, फतेह सिंह, सरबजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, दलजीत सिंह, कुलवंत सिंह, अमरदीप सिंह, रवींद्र सिंह आदि उपस्थित थे।
