
राजकुमार / हरिद्वार। सबसे सवेदनशील कांवड़ मेला प्रशासनिक सूझबूझ, बेहतर समन्वय और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मिसाल बनकर सामने आया। लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले इस बेहद संवेदनशील आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका की स्थानीय लोगों के साथ ही कांवड़ यात्रियों ने भी सराहना की।
30 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में लगातार बढ़ते भीड़ के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य, साफ़-सफाई और भीड़ नियंत्रण के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। राज्य सरकार ने भी मेले को “सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़” के लक्ष्य के साथ संचालित करने के निर्देश दिए थे।
मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था की गई। रिपोर्टों के अनुसार करीब 800 सीसीटीवी कैमरों के साथ ड्रोन के जरिए भीड़ और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी गई। इससे भीड़ के दबाव वाले स्थानों की तत्काल पहचान और पुलिस बल की तैनाती में मदद मिली।
यातायात व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने पहले से विस्तृत रूट डायवर्जन और पार्किंग प्लान तैयार किया। अंतरराज्यीय समन्वय के लिए उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों के साथ बैठकें की गई थीं।
हरिद्वार पहुंचे कांवड़ यात्रियों और स्थानीय लोगों ने कहा कि भीड़ के बावजूद पुलिसकर्मी और प्रशासनिक टीमें लगातार सक्रिय दिखाई दीं। घाटों, प्रमुख मार्गों और पार्किंग क्षेत्रों में तैनाती से यात्रियों को दिशा-निर्देश मिलने में आसानी हुई। श्रद्धालुओं का कहना था कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन में व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती है, लेकिन इस बार कई स्तरों पर पहले से तैयारी दिखाई दी।
प्रशासन की तैयारियों को लेकर डीएम मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह ने भी मेले से पहले मीडिया के साथ संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी दी थी।
कांवड़ मेले की सफलता केवल भीड़ को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन के सामने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को एक साथ संतुलित रखने की चुनौती भी थी। ऐसे में मेले का शांतिपूर्ण समापन जिला प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
