
राजकुमार / हरिद्वार / श्यामपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह के निर्देश पर वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस को साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। श्यामपुर पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक स्विफ्ट कार से पांच संदिग्धों को दबोचकर कथित ‘मगध साइबर गैंग’ का पर्दाफाश किया है। पुलिस की कार्रवाई में जो सामान बरामद हुआ, उसने पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने ला दी। आरोपियों के कब्जे से 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये की नकदी बरामद हुई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस की शुरुआती जांच में 2 करोड़ 75 लाख रुपये से ज्यादा के संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन के सुराग मिले हैं। यानी मामला महज कुछ हजार या लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं, बल्कि इसके तार एक बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।
एसएसपी नवनीत सिंह ने पत्रकारों के समक्ष मामले का खुलासा करते हुए बताया बीती रात श्यामपुर पुलिस संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान स्विफ्ट कार संख्या UK-08AF-0560 कार को रोक कर तलाशी ली गई तो एक के बाद एक एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड और डिजिटल डिवाइस बरामद होने लगे।
पुलिस ने कार सवार पांचों लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। मोबाइल और लैपटॉप की प्रारंभिक जांच में व्हाट्सऐप चैट, बैंक खातों की डिटेल, क्यूआर कोड और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार के नालंदा और नवादा से लेकर हरिद्वार तक जुड़े होने की बात सामने आई है।
आरोप है कि साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से रकम को आगे भेजकर एटीएम के जरिए कैश निकाल लिया जाता था।
35 एटीएम कार्ड और 14 बैंक पासबुक की बरामदगी ने पुलिस के शक को और गहरा कर दिया है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इन खातों के असली धारक कौन हैं, खातों का संचालन कौन कर रहा था और करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पांच गिरफ्तार, कई और नाम सामने आने की उम्मीद…
पुलिस ने मामले में कृष्णा पाण्डे, निरंजन कुमार, सन्नी, चन्द्रमणि कुमार और चन्दन पाण्डे को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके बैंक खातों, केवाईसी दस्तावेजों, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की बारीकी से जांच की जा रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच के बाद गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और कथित मुख्य संचालकों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी।
एसएसपी नवनीत सिंह के निर्देशन में पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप अब पुलिस के लिए इस साइबर नेटवर्क की अंदरूनी कहानी खोलने का सबसे बड़ा जरिया हैं।
फिलहाल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, लेकिन बरामद 35 एटीएम कार्ड और करोड़ों के संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन इस कहानी के कई और किरदारों की ओर इशारा कर रहे हैं। अब पुलिस की नजर उस ‘मास्टरमाइंड’ पर है, जिसके इशारे पर साइबर ठगी का यह कथित नेटवर्क चल रहा था।
