
शिवराज यादव / हरिद्वार। गुरु नानक देव के ज्योति जोत दिवस और संक्रांत के अवसर पर गुरुद्वारों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह से ही संगत गुरुद्वारों में पहुंचता रही और श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के आगे माथा टेका। संगत ने देश में आ रही आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। लोगों की खुशहाली के लिए अरदास भी की गई।
इस दौरान गुरुद्वारों में सुखमनी साहिब पाठ, शब्द कीर्तन और कथा द्वारा संगत को निहाल किया गया। कथावाचक संत बलजिंदर सिंह शास्त्री, ज्ञानी पंकज सिंह ने गुरु नानक देव की कथा और संक्रांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव ने विश्व में घूम घूमकर लोगों को जागृत किया। उस समय लोग पढ़े लिखे नहीं होते थे उनमें ज्ञान की कमी थी। गुरु नानक देव ने अपने उपदेशों से लोगों को जागरूक किया। संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि गुरु नानक देव ने अच्छे बुरे का ज्ञान दिया। लोगों को पाखंड से बचाया और उनमें प्रभु भक्ति का संचार किया। बाबा पंडत ने कहा कि जब तक परमात्मा से लगाव नहीं होगा तब तक जीवन सफल नहीं होगा। परमात्मा से गुरु, संत ही मिला सकता है। इस अवसर पर संत मंजीत सिंह, संत तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, उज्जल सिंह सेठी, हरमोहन सिंह, इंदरजीत सिंह बिट्टू, अमरीक सिंह, रोहिताश सिंह, अनूप सिंह, नैनी महेंद्रू, सरबजीत कौर, सिमरनजीत सिंह, अपनिंदर कौर, कोमल, रमणीक सिंह, विक्रम सिंह, सतपाल सिंह, हरमोहन सिंह, बलविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, महेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, सिमरन कौर, सुरजीत सिंह, निर्मल सिंह, मोहन सिंह, अमर सिंह, सुखविंदर कौर आदि सैकड़ों श्रद्धालुगण उपस्थित थे।
