
शिवराज यादव / हरिद्वार। उत्तराखंड में क्षत्रिय समाज की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति के तथ्यात्मक अध्ययन और राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन की मांग को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ताओं अरुण भदोरिया, कमल भदोरिया, सुमेधा भदोरिया तथा एलएलबी छात्र चेतन भदोरिया ने राज्य मानवाधिकार आयोग, देहरादून में याचिका दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि क्षत्रिय समाज में भी आर्थिक रूप से कमजोर, निर्धन, बेरोजगार, किसान, श्रमिक, ग्रामीण तथा पूर्व सैनिक परिवार बड़ी संख्या में हैं, जिन्हें शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केवल जातीय पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का आकलन उचित नहीं है।
याचिका में राज्य गठन वर्ष 2000 से अब तक क्षत्रिय समाज की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति को लेकर सरकार द्वारा कराए गए किसी व्यापक सर्वेक्षण अथवा अध्ययन की रिपोर्ट मांगे जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, विधि, शिक्षा, रोजगार और मानवाधिकार के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।
